मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान कस्बा मवाना के निलोहा गांव में
हत्या के आरोप में जेल मे बंद युवक से मिलकर गांव लौट रहे उसके पिता और भाई पर आधा
दर्जन बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। पिता ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि उसके बेटे ने जांघ में गोली
लगने के बावजूद भागकर अपनी जान बचाई। बेटे को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस
घटना की जानकारी मिलते ही गुस्साए गांववालों ने मवाना-खुर्द मार्ग पर
टैक्टर-ट्रॉली में शव रखकर घंटों जाम लगाए रखा। अपनी मांगें पूरी होने के आश्वासन
के बाद ही वे रास्ते से हटे।
कवाल में भड़के दंगों की लपेट मे जब पूरा मुजफ्फरनगर आ गया था, उसी समय इसकी तपिश मेरठ के कस्बा
मवाना के निलोहा गांव तक भी पहुंची थी। गांव के मुंशी की हत्या होने से पूरे गांव
में तनाव फैल गया था। पुलिस ने मुंशी की हत्या के आरोप में गांव के ही सोनू पुत्र
नरेंद्र और अश्विनी को जेल भेज दिया था। रविवार को नरेंद्र अपने बेटे मोनू के साथ
जेल में बंद अपने बेटे सोनू से मिलने मेरठ जेल गया था। बताया जा रहा है कि जब
दोनों वापस गांव लौट रहे थे तो निलोहा के रास्ते में करीब आधा दर्जन हमलावरों ने
उन्हें घेर लिया और उन पर गोलियां बरसा दीं। गोली लगने से लहूलुहान नरेंद्र की
मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, मोनू वहां से भाग निकलने में सफल रहा।
घटना की सूचना कुछ ही देर में पूरे क्षेत्र में आग की तरह फैल
गई। क्षेत्र के लोगों ने नरेंद्र के शव को ट्रैक्टर पर रखकर मवाना खुर्द मार्ग पर
जाम लगा दिया। मामला दो संप्रदाय और मुजफ्फरनगर के दंगों के मामलों से जुड़ा होने
के कारण पुलिस के आला अधिकारी भारी मात्रा में फोर्स लेकर मौके पर पहुंच गए। घंटों
अधिकारी गांववलों को समझाने का प्रयास करते रहे। लेकिन गांववालों की नाराजगी कम
होती नहीं दिखी। बाद में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की काफी मान मनौव्वल के
बाद गांववालों ने उनके समक्ष तीन मांगे रखीं। उनकी मांग है कि जेल में बंद सोनू को
पिता के अंतिम संस्कार के लिए पैरोल पर रिहा किया जाए। हमलावरों की तीन दिनों के
अंदर गिरफ्तारी हो। मरने वाले के परिजनों को 10 लाख का मुआवजा दिया जाए।
अधिकारियों की ओर से अश्वासन दिए जाने के बाद गांववालों ने जाम खोला।
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