राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष
वीएम सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार न तो खुद सहकारी मिलों से किसानों का गन्ना
भुगतान करा रही है और न ही निजी मिलों पर भुगतान का दबाव बना रही है। सोमवार को
फिर से इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई है। हाईकोर्ट ने सरकार के आरसी व एफआइआर
के दावों को नकारते हुए मिल मालिकों की गिरफ्तारी की सूचना मांगी है। उन्होंने
दावा किया कि कोर्ट के माध्यम से दीवाली तक किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान करा दिया
जाएगा।
रविवार को मेरठ में वीएम सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट
ने 29 जुलाई को सहकारी व निजी चीनी मिलों को 15 दिन में किसानों के पूरे भुगतान का आदेश दिया था, लेकिन
मिलों ने साजिश करके मुकदमे की फाइल को ही गायब करा दिया। इसे तलाश करके 15
सितंबर को फिर सुनवाई कराई गई। इसके दबाव में सरकार में 290 करोड़ तथा निजी मिलों ने 2650 करोड़ का भुगतान किया। 1167
करोड़ केंद्र सरकार द्वारा निजी मिलों को दिया जाएगा। मिलों ने बची 3500
करोड़ की राशि आगामी सत्र में भुगतान करने की इजाजत मांगी। संगठन ने
विरोध करके मिलों की पोल कोर्ट में खोली है। बजाज ग्रुप तीन मिलें बंद करने की बात
कर रहा है, जबकि उसने सरकार से इस वर्ष बिना ब्याज का 4800
करोड़ रुपया लोन लिया है। उसे मात्र 2950 करोड़
किसानों को देना है। सिंभावली मिल को भी 490 करोड़ देना है,
लेकिन उसने 1300 करोड़ लोन लिया है। यह पैसा
लेने के बाद भी किसानों को नहीं दिया। सरकार भी मिलों से मिली है। कोर्ट ने रिकवरी
पत्र और एफआइआर के दावों को नकारते हुए मिल मालिकों को जेल भेजने का आदेश दिया है।
सोमवार को फिर से कोर्ट में सुनवाई है। दीवाली तक किसानों को उनका शत प्रतिशत
भुगतान कराया जाएगा।

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