Thursday, September 24, 2015

केंद्र सरकार को ताकत का अहसास कराने की हुंकार भी सिर्फ आश्वासन ही ला सकी

मेरठ को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए व्यापारी राजनीति की धमाचौकड़ी बेअसर साबित हो रही है। मेरठ-बंद के जरिये प्रदेश व केंद्र सरकार को ताकत का अहसास कराने की हुंकार भी सिर्फ आश्वासन ही ला सकी।
15 सितंबर को मेरठ बंद से शुरु हुई सियासत से व्यापारिक राजनीति भी गरमा गई है। व्यापार संघ में लंबे समय तक राजनीति करने वाले अक्सर हाशिये पर पहुंच जाते हैं। इसे भांपते हुए नवीन ने सियासी पैंतरा खेला। मेरठ बंद के साथ जहां व्यापारिक शक्ति का अहसास कराने का प्रयास किया गया तो भाजपा से दूरी बना सियासी बिसात भी बिछा दी। भाजपा से दूरी बनायी सपा से नजदीकी दिखाई। लोनिवि मंत्री शिवपाल यादव ने नवीन को सपा में आने का निमंत्रण देते हुए जहां भाजपा के वोटबैंक में सेंधमारी का प्रयास किया।
सियासी हवा का रुख भांपते हुए नवीन गुप्ता ने भी सेफ मोड में चाल चल दी। लोकसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी का दामन थामने वाले नवीन सक्रिय राजनीति में प्रवेश के लिए लंबे समय से हाथ-पैर मार रहे हैं। आप से टिकट न मिलने पर नवीन ने बैक गियर डालते हुए फिर से भाजपा का दामन थाम लिया था। भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष, सांसद, महापौर के साथ ही चार विधायक और कई नेताओं के रहते मजबूत स्थिति बनाना मुश्किल था। ऐसे में उन्हें साइकिल की सवारी मुफीद लग रही है।
संयुक्त व्यापार संघ की राजनीति अब प्रशासन को जड़ तक हिलाने की क्षमता खो चुकी है, लेकिन वोट बैंक व समर्थन के लिहाज से वह किसी भी सियासी दल को लुभाने की क्षमता रखता है। नवीन गुप्ता मौके को भांपते हुए भले चाल चल रहे हैं,लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान संयुक्त व्यापार संघ की धार भी कमजोर हुई। उनके समर्थक इसकी वजह गुटबाजी बता रहे हैं। लेकिन उसकी जिम्मेदारी से नवीन बच नहीं सकते। नवीन गुप्ता निजी व्यापार और जाति विशेष के व्यापारियों का पक्ष लेने के साथ ही कई आरोपों से घिरे। मंत्री शिवपाल यादव से मुलाकात हो या मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से, नवीन गुप्ता स्मार्ट सिटी की पैरवी कम अपने लिए माहौल बनाते ज्यादा नजर आए। उपाध्यक्ष कमल ठाकुर व पवन मित्तल, महामंत्री संजय जैन आदि पूरी तरह से उपेक्षित रहे।

बेदम होती व्यापारिक राजनीति की बानगी बुधवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान भी दिखी। इस दौरान संघ पदाधिकारियों की बात करें तो महज गौरव शर्मा, सतीश चंद जैन व विपुल सिंघल ही नवीन गुप्ता के साथ थे। अन्य लोगों ने किनारा कर लिया तो बाहरी लोगों को साथ ले जाया गया। व्यापार संघ में बिखराव साफ दिख रहा है। सियासी पंडितों का कहना है कि सपा ने मेरठ में भाजपाई जड़ें हिलाने के लिए नवीन गुप्ता के रूप में व्यूह रचना की है। नवीन के सियासी कदम से राजनीतिक हलचल तेज हो गयी है।

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